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प्रेस विज्ञप्ति, 4 दिसंबर 2023 — कार्बन ऑफ़सेटिंग ने पिछले 2 दशक में असल जलवायु कार्रवाई को कमज़ोर करने, मानवाधिकार और स्थानीय अधिकारों का हनन करने और समुदायों को ख़तरनाक नुकसान पहुँचाने का काम किया है। इसके बावजूद, इस वक़्त संयुक्त अरब अमीरात में जारी संयुक्त राष्ट्र की जलवायु बैठक(COP28) कार्बन ऑफ़सेट का प्रचार करने वाला सबसे बड़ा कार्यक्रम साबित होने वाला है। आने वाले हफ़्ते में, सरकारें यह तय करेंगे कि कार्बन ऑफ़सेट को अंतरराष्ट्रीय जलवायु नीति में चालू किया जाए या नहीं और यूएई की अध्यक्षता में कई प्रचार वाले कार्यक्रम किये जाएंगे।

कार्बन मार्किट प्रोजेक्ट द्वारा स्थानीय समुदायों को होने वाले नुकसान और धोखे को अच्छी तरह से दर्ज किया गया है। 2023 में, शैक्षणिक शोध, मीडिया और नागरिक समाज की जांच ने इस बात का खुलासा किया है कि कैसे यह प्रोजेक्ट लगातार फैंटम ऑफ़सेट पैदा करते हैं और ज़मीन हथियाने और मानव और स्वदेशी अधिकारों का हनन करने का काम करते हैं (नीचे देखें)। हालिया उदाहरण केन्या के माऊ जंगलों से कार्बन ऑफ़सेट प्रोजेक्ट के लिए ओगीएक समुदाय के लोगों के जबरन विस्थापन का है। इसी में अमेरिका के वाइल्डलाइफ़ वर्क्स द्वारा चलाये जा रहे केन्या के ऑफ़सेट प्रोजेक्ट में हुए यौन शोषण के कई गंभीर मामले भी शामिल हैं। पिछले महीनों में, केन्या, लाइबेरिया, तंज़ानिया, ज़ाम्बिया और ज़िम्बाब्वे ने दुबई आधारित Blue Carbon के साथ 24 मिलियन हेक्टेयर की सामुदायिक ज़मीन कवर करने वाले समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

कार्बन ऑफ़सेटिंग के नए मोर्चे कृषि मिट्टी और तटीय और समुद्री क्षेत्रों को कार्बन “रिमूवल” में बदलने की होड़ पर आधारित हैं, जिन पर कंपनियों द्वारा कार्बन को अलग करने और “नए” कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने का आरोप लगाया जाता है। इनमें से कोई भी तकनीक स्थायी रूप से कार्बन स्टोर करने के लिए उचित साबित नहीं हुई है। उदाहरण के लिए, बड़े पैमाने पर औद्योगिक सीवीड खेती, तटीय समुदायों के क्षेत्रों का उल्लंघन कर रही है और समुद्री पर्यावरण और समुद्री फ़ूड वेब के लिए नए ख़तरे पैदा कर रही है।

कार्बन ऑफ़सेटिंग ने जियोइंजीनियरिंग और जलवायु अस्तव्यस्तता से मुनाफ़ा बनाने वाले उद्योग को बढ़ावा दिया है जिससे अक्सर स्थानीय और स्वदेशी समुदायों को नुकसान होता है। कार्बन ऑफ़सेट परियोजना डेवलपर्स, मानक निकायों, लेखा परीक्षकों और क्रेडिट प्रदाताओं ने कार्बन क्रेडिट देने से लाखों लोगों की जेबें भरी हैं जो उत्सर्जन को कम करने में असफल रहे हैं और जलवायु संकट को बढ़ावा दिया है। यह परियोजनाएँ, जिनमें से कई को तथाकथित ‘प्रकृति आधारित समाधान’ या ‘प्राकृतिक जलवायु समाधान’ के रूप में या, तटीय और समुद्री क्षेत्रों में, ‘ब्लू कार्बन’ के रूप में पेश किया जाता है। इसकी वजह से किसानों और स्थानीय समुदायों के लिए अपने अधिकारों की रक्षा करना और सामुदायिक क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करने की क़ानूनी लड़ाई और मुश्किल हो गई है। Cordillera Azul National Park REDD project (PNCAZ) में, पेरू के अमेज़न में Kichwa समुदायों पर इन महंगे प्रोजेक्ट का प्रभाव पड़ा है। इंडोनेशिया के Katingan Peatland Restoration and Conservation Project भी Dayak समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। Total Energies के “प्राक्रतिक समाधान” के तहत कांगो गणराज्य के Bateke Plateau में ऑफ़सेटिंग के लिए वृक्षारोपण शामिल है। यह पठार Aka स्वदेशी समुदायों और Bantu किसानों का घर है। यह भी ऑफ़सेटिंग का ऐसा मामला है जिसमें सामुदायिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। चूँकि ये परियोजनाएँ सदियों पुरानी बेदख़ली को जारी रखती हैं, अब “हरित” समर्थन के नाम, वे ज़मीनों/जंगलों पर कब्ज़ा करने वाले उपनिवेशवाद के समान हैं।

कार्बन बाज़ार जलवायु परिवर्तन का समाधान नहीं हैं। जिस चीज़ की तत्काल आवश्यकता है वह है जीवाश्म ईंधन को ज़मीन में रखने और समानता और न्याय के आधार पर वास्तविक जलवायु कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्धता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करना।

 

QUOTES 

Jutta Kill, World Rainforest Movement ने कहा, “कार्बन ऑफ़सेट ट्रेडिंग लापरवाह और गैरज़िम्मेदाराना है। संरचनात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण अवधारणा को ठीक करने के प्रयासों में बहुत अधिक समय बर्बाद किया गया है। बहुत सी परियोजनाओं के कारण भूमि पर कब्ज़ा हो गया है और किसानों, स्वदेशी लोगों और समुदायों में संघर्ष और नुकसान हुआ है।”

Shalmali Guttal Focus on the Global South ने कहा, “छोटे पैमाने के मछुआरों, तटीय और अंतर्देशीय समुदायों के संगठनों ने तथाकथित ‘ब्लू इकोनॉमी’ को स्पष्ट रूप से ख़ारिज कर दिया है और बताया है कि ‘जलवायु उपनिवेशीकरण’ को आगे बढ़ाने के लिए स्थिरता और लचीलेपन की अवधारणाओं का ग़लत उपयोग किया जा रहा है। 

Kirtana Chandrasekaran, Friends of the Earth International ने कहा, “कार्बन बाज़ार बड़े प्रदूषकों द्वारा जंगलों पर कब्ज़ा करने को बढ़ावा देता है। फिर भी COP28 में सरकारें इस बात पर निर्णय लेंगी कि नई भूमि, समुद्र और नई प्रकार की जोखिम भरी ऑफ़सेट गतिविधियों को शामिल करने के लिए कार्बन बाज़ार के दायरे का विस्तार किया जाए या नहीं। यह जलवायु और अग्रिम पंक्ति के समुदायों के लिए एक आपदा होगी। हमें वास्तविक उत्सर्जन में कटौती और वास्तविक जलवायु वित्त की ज़रूरत है। इससे कम कुछ भी करना असफलता माना जायेगा।”

Devlin Kuyek, GRAIN ने कहा, “कार्बन बाज़ार, ऑफ़सेट योजनाएं और कार्बन “निष्कासन” जलवायु संकट का समाधान नहीं हो सकते हैं। वे एक ऐसी प्रणाली का समर्थन करते हैं जिसने कॉर्पोरेट प्रदूषकों और अमीर देशों को सही दिशा में कदम उठाने में देरी करने और संकट से लाभ कमाने में सक्षम बनाया है। चाहे अनियमित हो या संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी की मुहर के साथ, REDD या तथाकथित “प्रकृति-आधारित समाधान” और “ब्लू कार्बन” जैसी कार्बन ऑफ़सेटिंग एक धोखाधड़ी है जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।”

Laura Dunn, ETC group ने कहा, “कार्बन ऑफ़सेट दुनिया में, समुद्री शैवाल को नए “हरित” तेल के रूप में जाना जाता है। लेकिन हमारी हालिया रिपोर्ट The Seaweed Delusion से पता चलता है कि औद्योगिक समुद्री शैवाल खेती हमारी प्रकृति या जलवायु को नहीं बचाएगी। धरती पर जियोइंजीनियरिंग करने से यहां मौजूद विशालकाय समुद्री शैवाल पूरे इकोसिस्टम को नष्ट काr देगा और तटीय समुदायों को खतरे में डाल देगा।”

Anuradha Mittal, Executive Director of the Oakland Institute ने कहा, “COP28 में, विश्व नेताओं और जलवायु विशेषज्ञों को यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि कार्बन बाज़ार जलवायु वित्त का असफल स्रोत है। यह अस्थिर, धोखाधड़ी के मशहूर, उत्सर्जन कम करने में असमर्थ है और वास्तव में समुदायों को नुकसान पहुँचाता है। हम इस झूठे समाधान पर और समय बर्बाद नहीं कर सकते। दुनिया को जलवायु संरक्षण से जुड़े ठोस वैकल्पिक तरीकों की तत्काल ज़रूरत है, क्योंकि कार्बन बाज़ार असफल हो गए हैं।”

Jose Bravo, Just Transition Alliance ने कहा: “प्रदूषण व्यापार और ऑफ़सेट योजनाओं ने केवल दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषणकारी कॉर्पोरेट घरानों की जेबें भरने का काम किया है। इस COP28 जैसे दिखावे के बाद किसी भी विश्वसनीयता को हासिल करने के लिए, UNFCCC को ऐसे प्रदूषक सब्सिडी से दूर जाने और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और समुदायों के नेतृत्व का अनुसरण करना शुरू करने की ज़रूरत है जो वास्तविक जलवायु समाधानों के आधार पर न्यायसंगत संक्रमण पथ बना रहे हैं।

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NOTES

कार्बन ऑफ़सेट प्रोजेक्ट द्वारा स्थानीय समुदायों को हुए नुकसान के कुछ उदाहरण : 

    • Chevron द्वारा ख़रीदे गए क़रीब आधे ऑफ़सेट, ख़ास तौर पर वैश्विक दक्षिण या जलवायु संकट के मोर्चे पर, समुदायों को नुकसान पहुंचाने और पारिस्थितिक तंत्र को कमज़ोर करने के आरोपों और दावों से जुड़े हैं।
    • कार्बन ऑफ़सेट प्रोजेक्ट के वैश्विक मैप से पता चलता है कि पिछले 5 सालों में 72% ने देशज या स्थानीय समुदायों को नुकसान पहुंचाया है।
    • भारत के केरल में कार्बन क्रेडिट पैदा करने के लिए बनाया गया refuse आधारित फ़्यूल प्रोजेक्ट घनी आबादी वाले गांवों की हवा में ज़हर घोल रहा है।
    • कॉन्गो गणराज्य में Total के ऑफ़सेट प्रोजेक्ट किसानों से ज़मीन हथिया कर उनकी आजीविका को ख़तरे में डाला है।
    • पेरू में Alto Mayo REDD+ प्रोजेक्ट के अंतर्गत रह रहे समुदायों को पार्क अधिकारियों द्वारा हिंसक रूप से उनके घरों से बेदख़ल कर दिया गया है।
    • African Forestry Impact Platform ने हाल ही में Green Resources का अधिग्रहण किया है। यह एक नॉर्वेजियन वृक्षारोपण वानिकी और कार्बन क्रेडिट कंपनी है जिसका यूगांडा, मोजांबिक एंड तंज़ानिया में ज़मीन हथियाने, मानवाधिकार हनन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का इतिहास रहा है।

फैंटम क्रेडिट में धोखा और व्यापार के कुछ उदाहरण : 

    • ज़िम्बाब्वे में साउथ पोल के Kariba REDD प्रोजेक्ट अक्टूबर 2023 में ध्वस्त होने से पहले लगभग 100 मिलियन डॉलर कार्बन क्रेडिट में जमा किये थे। न्यू यॉर्कर ने इसे “कैश-फ़ॉर-कार्बन हसल” कहा है।
    • 2023 के एक अध्ययन में पाया गया कि दुनिया की अधिकांश अहम कार्बन ऑफ़सेट प्रोजेक्ट को “लगभग कबाड़” के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जबकि एक अन्य शोध ने दुनिया के अहम कार्बन ऑफ़सेट प्रमाणनकर्ता को देखते हुए पाया कि “अधिकांश क्रेडिट शायद किसी भी जलवायु लाभ का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।” 
    • Mongabay और The New Humanitarian के एक शोध में पाया गया कि संयुक्त राष्ट्र के कार्बन न्यूट्रलिटि के दावे ज़्यादातर कार्बन ऑफ़सेट क्रेडिट पर निर्भर हैं जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को रोकने के लिए बहुत कम काम करते हैं, इनमें से कुछ पर पर्यावरण को नुकसान, स्वास्थ्य समस्याएं, विस्थापन का भी आरोप लगा है।
    • Northern Rangelands Trust(NRT) द्वारा चलाए जाने वाले Northern Kenya Grassland Carbon Project के आंकलन में पाया गया कि यह त्रुटिपूर्ण पद्धतिगत मान्यताओं पर निर्भर करता है, जो इससे उत्पन्न ऑफ़सेट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
    • Le Monde की एक जांच में पता चला कि पोर्टल, ब्राज़ील में 3 कार्बन ऑफ़सेटिंग प्रोजेक्ट – जिन्होंने एयर फ़्रांस, बोइंग, बायर, वेओलिया, LCL और सैमसंग को क्रेडिट बेचे हैं; वह झूठे हैं और उनका कोई जलवायु फ़ायदा नहीं है।
    • पापुआ न्यू गिनी में, ABC की एक जांच में यूएस-आधारित कंपनी NIHT द्वारा संचालित कार्बन क्रेडिट योजना द्वारा संरक्षित किए जाने वाले वर्षावन में व्यावसायिक लॉगिंग के सबूत मिले।
    • यूएस-आधारित Penn Center for Science, Sustainability and the Media के एक प्रकाशन का निष्कर्ष है कि कार्बन ऑफ़सेट यूएन-पेरिस समझौते को कमज़ोर करता है।
    • पूर्व ऑफ़सेट प्रोवाइडर Compensate की रिसर्च ने सुझाया है कि मार्केट में बेचे जाने वाले 170 से ज़्यादा ‘प्रकृति आधारित’ ऑफ़सेट प्रोजेक्ट के क्रेडिट “ऑफ़सेट इस्तेमाल के लिए उपयोगी नहीं हैं।”
    • अपने स्वयं के विश्लेषण के आधार पर, ऑफ़सेट रेटिंग एजेंसी BeZero ने नोट किया कि “कार्बन बाजारों का सिद्धांत मानता है कि सभी क्रेडिट 1 tCO₂e के बराबर उत्सर्जन से बचाव या निष्कासन का प्रतिनिधित्व करते हैं … सबूत दिखाते हैं कि यह मामला ऐसा नहीं है।”

 

संगठन : 

 

मीडिया : 

    • Friends of the Earth International: Madeleine Race, communications officer, [email protected], +31 645 198 654 (EN, FR, ESP)
    • GRAIN (agriculture/food): Ange David Baimey, [email protected], +22505345274, Côte d’Ivoire (EN,FR)
    • Focus on the Global South: Shalmali Guttal, [email protected]. India and Thailand. +918971368696.
    • ETC group (geoengineering, carbon removals ): Laura Dunn, [email protected] +1 514-607-9979 (EN)
    • The Oakland Institute: Anuradha Mittal [email protected] +1 510 469 5228
    • Indigenous Climate Action: ATTN: Katie Wilson & Rosalyn Boucha, [email protected] (EN)